उद्देश्य एवं कार्य

संचालनालय का मुख्य उद्देश्य नियोजित एवं समन्वित विकास की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में प्रादेशिक योजना तथा नगरीय क्षेत्रों में विकास योजना तैयार करना है। इन योजनाओं का समुचित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा छत्तीसगढ़ राज्य में भूमि के विकास एवं भूमि के उपयोग पर नियंत्रण रखने हेतु तकनीकी मार्गदर्शन एवं विकास अनुज्ञा जारी करने का कार्य भी संचालनालय के विभिन्न कार्यालयों द्वारा किया जाता है। संक्षेप में संचालनालय के कार्य निम्नानुसार है:-

(अ) प्रादेशिक योजना बनाना: राज्य शासन को अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत राज्य के किसी भी क्षेत्र को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये प्रदेश घोषित कर उसकी सीमाएं निश्चित करने और उसका नाम निर्दिष्ट करने की अधिकारिता है। जिसके लिये अधिनियम की धारा 4 से 12 में दिये गये प्रावधानों के तहत संचालनालय द्वारा प्रादेशिक योजना तैयार का कार्य किया जाता है।
(ब) विकास योजना तैयार करना:  प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के लिये विकास योजना (मास्टर प्लान) बनाने तथा पर्यटन एवं धार्मिक महत्व के स्थानों के लिए विशेष विकास योजना बनाने का कार्य छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 13 से लेकर 19 में उल्लेखित प्रावधानों के अंतर्गत निम्न चरणों में किया जाता है:-
1) निवेश क्षेत्र का गठन करना
2) वर्तमान भूमि उपयोग मानचित्र तैयार करना।
3) विकास योजना/परिक्षेत्रीय योजना प्रारूप तैयार करना।
4) विकास योजना का प्रकाशन एवं अंगीकरण करना।
(स) विकास योजनाओं का क्रियान्वयन: विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में नगरीय निकायों/विकास प्राधिकरण को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करना तथा विकास अनुज्ञा जारी करने का कार्य किया जाता है।
(द) भूमि के विकास एवं भूमि के उपयोग पर नियंत्रण: राज्य के भूमि के विकास एवं भूमि उपयोग पर नियंत्रण हेतु छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के अंतर्गत बनायी गई विकास योजना एवं छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में उल्लेखित प्रावधानों के निम्नानुसार कार्य किये जाते है:-
1) शासकीय एवं अर्द्धशासकीय संस्थाओं एवं निजी विकासकर्ताओं को विकास अनुज्ञा प्रदान करना/नजूल/शासकीय भूमि आबंटन हेतु तथा भूमि के व्यपवर्तन हेतु अभिमत/अनापत्ति प्रदान करना।
2) औद्योगिक विकास केन्द्रों/औद्योगिक क्षेत्र की योजनाओं को स्वीकृति प्रदान करना/निजी उद्योगों के विकास हेतु अनुज्ञा/अभिमत प्रदान करना।
3) राज्य शासन एवं अन्य विकास संस्थाओं के नगरीय नियोजन एवं प्रबंधन संबंधी नीति निर्धारण में आवश्यक सहायता करना।
4) अवैध भूमि विकास के विरूद्ध नियंत्रण/अभियोजन एवं हटाये जाने की कार्यवाही करना।
5) प्रदेश की आवास नीति एवं पर्यावरण नीति द्वारा घोषित नीति के अनुरूप नगरों के विकास हेतु कार्यवाही करना।
6) झुग्गी-झोपड़ी के व्यवस्थापन हेतु नियोजन संबंधी राय नगरीय निकायों को देना तथा इस हेतु अभिन्यास स्वीकृत करना।
7) नगरों के यातायात सुधारने हेतु नगरीय निकायों को नियोजन संबंधी राय देने तथा नवीन मार्गों/चैराहों के विकास हेतु आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करना।
(ध) विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठनः अधिनियम के अंतर्गत ऐसे संभावित क्षेत्र जिनका विकास विशेष परिस्थिति के कारण किया जाना आवश्यक हो जैसे- औद्योगिक गतिविधियों, खनिज, विशेष नदी क्षेत्र के विकास तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये इन क्षेत्रों के सुनियोजित विकास के लिये विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण गठित किए जाते हैं । वर्तमान में रायपुर राजधानी क्षेत्र के लिये एन0आर0डी0ए0 एवं उससे लगे क्षेत्र के लिये, क्षेत्र के लिये पुरा विशेष क्षेत्र का गठन किया गया है, विशेष खनिज एवं औद्योगिक क्षेत्र के लिए तमनार (रायगढ़) एवं सीपत (बिलासपुर) में विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है । नदी क्षेत्र के विकास हेतु अरपा एवं अमरकंटक विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के रूप मे गठन किए गये है| खारून (साडा) गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है|